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भावनाओं का स्रोत : हृदय या मस्तिष्क - वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण

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मनुष्य का शरीर केवल रासायनिक और भौतिक क्रियाओं का पिंड नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा का भी एक सजीव स्रोत है। विज्ञान और अध्यात्म दोनों इस बात को मानते हैं कि हमारे शरीर से एक प्रकार का विद्युतचुंबकीय (electromagnetic) क्षेत्र उत्पन्न होता है। इस लेख में हम विशेष रूप से हृदय और मस्तिष्क द्वारा उत्पन्न विद्युतचुंबकीय क्षेत्रों का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक विश्लेषण करेंगे और यह समझने की कोशिश करेंगे कि इनका हमारे जीवन, भावनाओं और चेतना पर क्या प्रभाव पड़ता है। विद्युतचुंबकीय क्षेत्र क्या होता है? जब भी कोई विद्युत धारा किसी माध्यम से बहती है, तो उसके चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। इसी तरह से, जब हमारे शरीर में विद्युत गतिविधियाँ होती हैं – जैसे कि दिल की धड़कन या मस्तिष्क की तरंगें – तब हमारे शरीर के चारों ओर एक विद्युतचुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। यह क्षेत्र अदृश्य होता है, लेकिन वैज्ञानिक यंत्रों द्वारा इसे मापा जा सकता है। हृदय का विद्युतचुंबकीय क्षेत्र हृदय हमारे शरीर का सबसे शक्तिशाली विद्युत जनरेटर है। हृदय न केवल रक्त को पंप करता है, बल्कि यह प्रत...

क्या मनुष्य बिना खाए पिए वर्षों तक साधना कर सकता है ?

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हमने हिन्दू धर्म की पौराणिक गाथाओं में ऋषि-मुनिओं की तपस्या के बारे में बहुत कुछ पढ़ा व सुना है | कुछ टीवी धारावाहिकों में भी ये चीज़ दिखाई गयी है की ऋषि-मुनि सालों तक बिना कुछ खाए पिए तपस्या में लीन रहते थे | आज के समय में ये सब असंभव प्रतीत होता है | कुछ लोग इसे सिर्फ कल्पना मानते हैं , या कवियों द्वारा किया गया अतिशोक्ति अलंकार का प्रयोग भर मानते हैं | लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कुछ मामले सामने आये हैं जिन्होंने हमें अपना द्रष्टिकोण बदलने पर बाध्य किया है | भारत के प्रह्लाद जनि और नेपाल के राम बहादुर बामजान ऐसे ही कुछ योगिओं में से हैं जिन्होंने अपनी योग शक्ति के बल पर ये चमत्कार कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया है | कुछ लोग इसे शक की नज़र से देख रहे हैं , तो कुछ भक्ति और श्रधा की नज़र से | शक करना भी जायज़ है, क्योंकि हमारे मेडिकल विज्ञानं के अनुसार तो कोई व्यक्ति बिना पानी के 7 दिन से ज्यादा जीवित नहीं रह सकता | लेकिन एक वर्ग ऐसा भी है जो इन बातों पे पूरा विश्वास करते है और मानते है की योग साधना के बल पे कुछ भी संभव है | व्रत करना और अनशन पे बैठना अलग बात है , पर एक वर्ग ऐसा भी है जो...

क्या कोई व्यक्ति हिमालय पर केवल शॉर्ट्स पहन कर जीवित रह सकता है ?

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यह सवाल थोड़ा अजीब लगता है लेकिन किसी ने इस अलौकिक क्षमता को प्राप्त किया है। वह व्यक्ति न केवल हिमालय में शॉर्ट्स में जीवित रहा, बल्कि माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का साहस भी दिखाया । यह एक अनोखी उपलब्धि थी जो मानव जाति के इतिहास में किसी ने भी करने की हिम्मत नहीं की थी । इस व्यक्ति का नाम है "विम हॉफ" और उन्होंने यह वर्ष 2007 में किया और 23,600 फीट तक पहुंच गए । हालाँकि वह अपने प्रयास में सफल नहीं हुए, लेकिन फिर भी उन्होंने शॉर्ट्स और सैंडल में ऐसा करके विश्व रिकॉर्ड बनाया। Wim Hof , जिन्हें "आइस-मैन" के रूप में भी जाना जाता है, उन्होंने सांस और मन को नियंत्रित करने की शक्ति के माध्यम से इस अलौकिक क्षमता को प्राप्त किया। उनके अनुसार समर्पण और दृढ़ इच्छा शक्ति के जरिए कोई भी इसे हासिल कर सकता है। एवरेस्ट पर चढ़ना सिर्फ एक काम है जो विम हॉफ ने अपनी क्षमता दिखाने के लिए किया है। उन्होंने अंडर-आइस स्विमिंग (वर्ष 2000 में 57.5 मीटर), पानी के बिना नामीब रेगिस्तान में मैराथन दौड़ (2009) जैसे कार्यों के लिए 26 विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किए और 2 दिनों में सिर्फ शॉर्ट्स पहनकर माउं...