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भावनाओं का स्रोत : हृदय या मस्तिष्क - वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण

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मनुष्य का शरीर केवल रासायनिक और भौतिक क्रियाओं का पिंड नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा का भी एक सजीव स्रोत है। विज्ञान और अध्यात्म दोनों इस बात को मानते हैं कि हमारे शरीर से एक प्रकार का विद्युतचुंबकीय (electromagnetic) क्षेत्र उत्पन्न होता है। इस लेख में हम विशेष रूप से हृदय और मस्तिष्क द्वारा उत्पन्न विद्युतचुंबकीय क्षेत्रों का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक विश्लेषण करेंगे और यह समझने की कोशिश करेंगे कि इनका हमारे जीवन, भावनाओं और चेतना पर क्या प्रभाव पड़ता है। विद्युतचुंबकीय क्षेत्र क्या होता है? जब भी कोई विद्युत धारा किसी माध्यम से बहती है, तो उसके चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। इसी तरह से, जब हमारे शरीर में विद्युत गतिविधियाँ होती हैं – जैसे कि दिल की धड़कन या मस्तिष्क की तरंगें – तब हमारे शरीर के चारों ओर एक विद्युतचुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। यह क्षेत्र अदृश्य होता है, लेकिन वैज्ञानिक यंत्रों द्वारा इसे मापा जा सकता है। हृदय का विद्युतचुंबकीय क्षेत्र हृदय हमारे शरीर का सबसे शक्तिशाली विद्युत जनरेटर है। हृदय न केवल रक्त को पंप करता है, बल्कि यह प्रत...

क्या दिवाली पर आतिशबाज़ी करना सनातन परंपरा है?

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क्या दिवाली पर आतिशबाज़ी करना सनातन परंपरा है? – एक ऐतिहासिक और धार्मिक विश्लेषण हर वर्ष दीपावली का पर्व आते ही एक पुराना विवाद दोबारा जन्म लेता है — “क्या दिवाली पर पटाखे जलाना हमारी सनातन परंपरा का हिस्सा है?” कुछ लोग मानते हैं कि आतिशबाज़ी पर रोक लगाना हिंदू परंपराओं का अपमान है, जबकि कुछ लोग इसे प्रदूषण और असंयम का प्रतीक मानते हैं। इस लेख का उद्देश्य किसी की आस्था पर प्रश्न उठाना नहीं है, बल्कि तथ्यों, इतिहास और शास्त्रों के आधार पर 1. दीपावली का मूल स्वरूप: प्रकाश और सदाचार का उत्सव ‘दीपावली’ शब्द स्वयं अपने अर्थ में स्पष्ट है — दीपों की पंक्ति । यह ‘अंधकार पर प्रकाश’ और ‘अज्ञान पर ज्ञान’ की विजय का प्रतीक है। वेदों और पुराणों में दीपदान को पुण्यकर्म कहा गया है। ऋग्वेद (9.73.7) में कहा गया है — “तमसो मा ज्योतिर्गमय” अर्थात् अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। स्कंद पुराण, पद्म पुराण और कात्यायन स्मृति में दीपावली को लक्ष्मी पूजन, दान और घरों की सजावट का पर्व बताया गया है। इनमें कहीं भी पटाखों, बारूद या विस्फोटक वस्तुओं का उल्लेख नहीं है। प्राचीन भारत में लोग घी या ...

धार्मिक दंगों का असली कारण !

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सभी धर्म शांति की शिक्षा देते हैं, फिर भी आज तक दुनिया में सबसे ज्यादा झगडे धर्म के नाम पर ही हुए हैं | ऐसा क्या है सभी धर्मों की शिक्षा में जो व्यक्ति धर्म के नाम पर एक-दूसरे की गर्दन काटने से भी नहीं कतराता |  धार्मिक श्रेष्ठता  सभी धर्मों के लोग अपने धर्म को श्रेष्ठ समझते हैं, जो काफी हद तक उचित भी है | लेकिन यह श्रेष्ठता का भाव जब तक गर्व की सीमा तक है, तो सही है | किन्तु यदि यह श्रेष्ठता का भाव घमंड बन जाए तो बात बिगड़ जाती है | अपने धर्म पर गर्व यदि सीमा से अधिक हो जाए तो घमंड बन जाता है, जो दूसरे के धर्म को निम्न सिद्ध करना चाहता है | यह घमंड अपने भगवान् को सच्चा मानता है, और दूसरे के भगवान् को झूठ | धर्मान्तरण  दूसरे धर्म के लोगों को अपने धर्म में शामिल कराना "धर्मान्तरण" कहलाता है | मुस्लिम और इसाई धर्म में धर्मान्तरण को अच्छा व् सही माना जाता है , किन्तु हिन्दू धर्म में ऐसा नहीं है | यहीं से धार्मिक श्रेष्ठता सिद्ध करने की होड़ शुरू होती है | आप अपने धर्म को उच्च और दूसरे के धर्म को तुच्छ साबित करके ही किसी व्यक्ति को अपने धर्म में मिला सकते हैं | यहीं से धार्मिक ...

Whatsapp पर फैलता झूठ (Spreading Rumors)

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आजकल हमारे देश में झूठ को एक फ्रॉड मैसेज के रूप में फैलाने में लोगों को इतनी महारत हासिल हो गई है कि लोग बिना कुछ सोचे समझे झट से मैसेज को whatsapp पर फॉरवर्ड कर देते हैं | हालांकि कुछ लोग यह इसलिए करते हैं कि वह दूसरों को जागरुक बना सके लेकिन सच्चाई यह है कि वह खुद ही जागरुक नहीं है | आजकल हमारे देश में whatsapp पर जिस तरीके से लोग गलतियां कर रहे हैं उससे हमारी अगली पीढ़ी के पास गलत जानकारियों का एक भंडार इकट्ठा हो जाएगा | संस्कृति के नाम पर झूठ  हमें इस बात की जरूरत है की whatsapp पर कोई भी मैसेज फॉरवर्ड करने से पहले हम एक बार इस चीज़ की जांच करें कि उस मैसेज में दी गई जानकारी सही भी है या नहीं| हमें अपनी संस्कृति पर गर्व है लेकिन कुछ लोग हमारे गर्व का सही फायदा ना उठा कर गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं| वह कुछ ऐसे मैसेज बनाते हैं जिसमें हमारी संस्कृति के बारे में कुछ अच्छा लिखा होता है लेकिन सच्चाई यह होती है कि वह बात एकदम सही नहीं होती| हम बिना तथ्यों को जाने उस मैसेज को इसलिए फॉरवर्ड कर देते हैं क्योंकि हमें अपनी संस्कृति पर गर्व है| संस्कृति पर गर्व होने का मतलब यह न...

बलात्कार का विरोधी हमारा बॉलीवुड और मीडिया ?

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आपने अक्सर देखा होगा की जब कोई बलात्कार की खबर नेशनल टीवी की खबर बनती है, जैसा की निर्भया काण्ड में हुआ था , तब बॉलीवुड हस्तियाँ महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की बात करने के लिए न्यूज़ चैनल्स पर बढ़ चढ़ कर बयान देते हैं. न्यूज़ चैनल्स के रिपोर्टर्स भी उन की ही बातें सारे दिन टीवी पर दिखाते हैं | आखिर सच्चाई क्या है ? क्या वाकई इन कलाकारों को कोई फर्क पड़ता है इन घटनाओं से ? या ये भी सिर्फ एक पब्लिसिटी स्टंट होता है | क्या न्यूज़ चैनल्स इन पीड़ित लड़कियों के साथ इन्साफ करना चाहते हैं | बलात्कार का विरोधी हमारा बॉलीवुड ? वो कहते हैं "We are gathering for a good cause", काहे का गुड कॉज ! वो महिलाओं के सम्मान की बात करते हैं और अपनी फिल्मों में नग्नता की सारी हदें पार कर देते हैं, और कोई पूछे तो कह देते हैं की ये तो स्टोरी की डिमांड थी ! Its a form of Art ! कोई इनसे पूछे की क्या आर्ट सिर्फ कपडे उतार के ही दिखाई जा सकती है क्या ? क्या आज तक बलात्कार का विरोध करने वाली किसी हिरोइन ने ये कहा है की वो अबसे कोई हॉट सीन नहीं करेगी | कहने को तो s-e-x भी कोई बुरी चीज़ नहीं है , यदि पति पत्नी ...

क्या गौ मूत्र से कोरोना जैसी बीमारी ठीक हो सकती है ?

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जब से कोरोना वायरस ने विश्व को घेरा है, तब से भारत भर में "गौ मूत्र" पर चर्चाएं चल रही है | कोई इसे आयुर्वैदिक औषधि बताता है, तो कोई अंधविश्वास | कोई इसके वैज्ञानिक आधार पर खरे न उतरने का तर्क देता है , तो कोई इस पर लिए गए पेटेंट्स की बात करता है | कोई इसे अमृत समझ कर पीने को तैयार है, तो कोई इसे अत्यंत घ्रणित वस्तु बता रहा है | वास्तविकता यह है की कोई भी सत्य जानने से ज्यादा , केवल अपने मत को सही सिद्ध करने में ज्यादा उत्सुक है | कुछ लोग धर्मांध होकर किसी भी गौ का मूत्र पीने को तैयार हैं , तो कोई तब तक पीने को तैयार नहीं है जब तक कोई अंग्रेज़ प्रोफेसर अंग्रेजी में उसे सही न बताये | जितना खतरा हमें चंद धर्मांध हिन्दुओं से है, उतना ही उन मतांध पढ़े लिखे लोगों से भी है जिन्हें अंग्रेजी में लिपटा हुआ असत्य भी सत्य लगता है | एक विष भी अमृत का काम कर सकता है यदि उसे सही मात्रा और सही विधि से लिया जाए, और एक औषधि भी विष का काम कर सकती है यदि उसे सही मात्रा और विधि से ना लिया जाए | हमारे पढ़े लिखे समाज को यह समझना चाहिए की आयुर्वेद भी एक विज्ञान है जो सदियों के शोध से विकसित हुआ है ...