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क्या किशोरों का दिमाग जोखिम लेने के लिए बना है, या केवल दोस्तों का दबाव?

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किशोरों को अक्सर आवेगी, लापरवाह और रोमांच खोजने वाला कहा जाता है। माता-पिता को उनकी आदतों जैसे तेज़ गाड़ी चलाना, असुरक्षित यौन संबंध, नशे का प्रयोग करना या सोशल मीडिया की चुनौतियों में भाग लेने की आदतों को लेकर चिंता रहती है। लेकिन असली सवाल यह है: क्या यह सब उनके दिमाग की बनावट के कारण होता है या फिर केवल साथियों के दबाव से? brahmagyaan.in पर हम मस्तिष्क विज्ञान और मनोविज्ञान के आधार पर इस विषय को गहराई से समझेंगे। सच यह है कि दोनों कारण मिलकर किशोरों के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। किशोर मस्तिष्क: निर्माण की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किशोरावस्था में दिमाग पूरी तरह परिपक्व नहीं होता। दिमाग का विकास लगभग 25 वर्ष की आयु तक चलता है। प्रिफ्रंटल कॉर्टेक्स , जो समझदारी, योजना बनाने और आवेग पर नियंत्रण करने में मदद करता है, सबसे आख़िर में विकसित होता है। इसके विपरीत, भावनाओं और आनंद से जुड़ा लिम्बिक तंत्र पहले ही विकसित हो जाता है। यही कारण है कि किशोर अक्सर तुरंत मिलने वाले सुख या आनंद को लंबे समय के परिणामों से अधिक महत्व देते हैं। “किशोरावस्था वह समय है जब दिम...

धार्मिक दंगों का असली कारण !

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सभी धर्म शांति की शिक्षा देते हैं, फिर भी आज तक दुनिया में सबसे ज्यादा झगडे धर्म के नाम पर ही हुए हैं | ऐसा क्या है सभी धर्मों की शिक्षा में जो व्यक्ति धर्म के नाम पर एक-दूसरे की गर्दन काटने से भी नहीं कतराता |  धार्मिक श्रेष्ठता  सभी धर्मों के लोग अपने धर्म को श्रेष्ठ समझते हैं, जो काफी हद तक उचित भी है | लेकिन यह श्रेष्ठता का भाव जब तक गर्व की सीमा तक है, तो सही है | किन्तु यदि यह श्रेष्ठता का भाव घमंड बन जाए तो बात बिगड़ जाती है | अपने धर्म पर गर्व यदि सीमा से अधिक हो जाए तो घमंड बन जाता है, जो दूसरे के धर्म को निम्न सिद्ध करना चाहता है | यह घमंड अपने भगवान् को सच्चा मानता है, और दूसरे के भगवान् को झूठ | धर्मान्तरण  दूसरे धर्म के लोगों को अपने धर्म में शामिल कराना "धर्मान्तरण" कहलाता है | मुस्लिम और इसाई धर्म में धर्मान्तरण को अच्छा व् सही माना जाता है , किन्तु हिन्दू धर्म में ऐसा नहीं है | यहीं से धार्मिक श्रेष्ठता सिद्ध करने की होड़ शुरू होती है | आप अपने धर्म को उच्च और दूसरे के धर्म को तुच्छ साबित करके ही किसी व्यक्ति को अपने धर्म में मिला सकते हैं | यहीं से धार्मिक ...

धर्म का अपमान : क्यों और कब तक

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खुद को सही साबित करने के दो तरीके होते हैं -  पहला यह की कुछ अच्छे तर्कों के साथ अपनी बात बात को सही साबित किया जाए | दूसरा यह की सामने वाले को गलत साबित कर दिया जाए, भले ही वह गलत तर्कों से हो | जब ज्ञानव्यापी में मिली आकृति को हिन्दू पक्ष शिवलिंग , और मुस्लिम पक्ष फव्वारा बता रहा था, तब कुछ लोगों ने बहुत सी अनाप-शनाप चीज़ों को शिवलिंग बता कर हिन्दू धर्म को मज़ाक उडाना शुरू कर दिया | हालांकि यह कोई नयी बात नहीं है | अपने अल्लाह को सही साबित करने के लिए ये लोग हमारी मूर्तियों को "बुत" और उन मूर्तियों के उपासकों को "बुतपरस्त" बोलते आ रहे हैं | हिन्दू ने कभी अल्लाह के अस्तित्व पर सवाल नहीं उठाया क्योंकि उस अल्लाह की व्याख्या हमारे "निराकार भगवान्" से मेल खाती है, जिसे हम निर्गुण परमात्मा या शून्य स्वरुप मानते हैं | किन्तु अपने अल्लाह को सही साबित करने के चक्कर में (जो करने की जरूरत है ही नहीं ), जब आप दूसरे के भगवान् को गलत साबित करने में लग जाते हैं, तभी आप गलत हो जाते हैं | रही बात शिवलिंग और फव्वारे की तो वो तय करने के लिए न्यायालय है | न्यायालय कोई धार्म...

Whatsapp पर फैलता झूठ (Spreading Rumors)

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आजकल हमारे देश में झूठ को एक फ्रॉड मैसेज के रूप में फैलाने में लोगों को इतनी महारत हासिल हो गई है कि लोग बिना कुछ सोचे समझे झट से मैसेज को whatsapp पर फॉरवर्ड कर देते हैं | हालांकि कुछ लोग यह इसलिए करते हैं कि वह दूसरों को जागरुक बना सके लेकिन सच्चाई यह है कि वह खुद ही जागरुक नहीं है | आजकल हमारे देश में whatsapp पर जिस तरीके से लोग गलतियां कर रहे हैं उससे हमारी अगली पीढ़ी के पास गलत जानकारियों का एक भंडार इकट्ठा हो जाएगा | संस्कृति के नाम पर झूठ  हमें इस बात की जरूरत है की whatsapp पर कोई भी मैसेज फॉरवर्ड करने से पहले हम एक बार इस चीज़ की जांच करें कि उस मैसेज में दी गई जानकारी सही भी है या नहीं| हमें अपनी संस्कृति पर गर्व है लेकिन कुछ लोग हमारे गर्व का सही फायदा ना उठा कर गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं| वह कुछ ऐसे मैसेज बनाते हैं जिसमें हमारी संस्कृति के बारे में कुछ अच्छा लिखा होता है लेकिन सच्चाई यह होती है कि वह बात एकदम सही नहीं होती| हम बिना तथ्यों को जाने उस मैसेज को इसलिए फॉरवर्ड कर देते हैं क्योंकि हमें अपनी संस्कृति पर गर्व है| संस्कृति पर गर्व होने का मतलब यह न...

धुम्रपान और शराब को बढ़ावा क्यों ?

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आज के दौर में हमारी नौजवान पीढ़ी को जो चीज़ सबसे ज्यादा बीमार और लाचार बना रही है, वो चीज़ है शराब और धुम्रपान | हमारी सरकारें एक तरफ तो शराब और सिगरेट के पैकेट्स पे वैधानिक चेतावनी लिखवाती हैं और दूसरी तरफ हमारा फिल्म सेंसर बोर्ड ऐसे गानों को पास करता है जो धुम्रपान और शराब को बढ़ावा देते हैं | "चार बोतल वोडका" और "मैं अल्कोहलिक हूँ" , ये दो ऐसे गाने हैं जो पूरी तरह शराब के ऊपर ही हैं , एक एक पंक्ति शराब के ऊपर | पर कोई  फर्क नहीं पड़ता | जिसे सुनना हो सुने , जिसे न सुनना हो न सुने (आख़िरकार ये एक आज़ाद मुल्क है) | पर हमारी सरकार को इसे ठन्डे बसते में नहीं डालना चाहिए | ये चीज़ें सिर्फ इन्हें पीने वालों को खतरे में नहीं डालती बल्कि उन लोगों को भी डालती हैं जो अनजाने में इनका शिकार होते हैं | एक बीडी-सिगरेट पीने वाला इंसान घर के बाहर सिगरेट नहीं पीता , क्योंकि वहां रोक है | पर घर लोटते ही वो सारी कसर पूरी करता है | घर में उसके परिवार के अन्य सदस्य भी उस धुएं का शिकार होते हैं , खास तौर पे बच्चे और बूढ़े | उन बच्चों और बूढों को कौन बचाएगा | खुद पीने वाला तो बचाएगा नही...

आरक्षण - सही या ग़लत

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आज भारतीय समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहाँ सब भारतीय होकर भी अलग अलग धर्म और जातियों में बटे हुए हैं | बटे हुए ये पहले भी थे लेकिन आज-कल चल रही आरक्षण की आग ने इन धर्म और जातियों को और दूर - दूर कर दिया है | जिस आरक्षण की शुरुआत सभी भारतीयों को एक स्तर पर लाने के लिए की गयी थी, वही आरक्षण अब आपसी द्वेष का कारण बन गया है | आज से ५० या १०० वर्ष पहले जो स्तिथि थी, अब वो नहीं है. आज एक ब्राह्मण सेना में काम कर रहा है, तो कहीं एक क्षत्रिय शिक्षक का कार्यभार संभाल रहा है | अब जातिगत आधार पर काम का बटवारा न के बराबर रह गया है | फिलहाल चल रहे आरक्षण से एक ही परिवार के सभी व्यक्ति सरकारी नौकरी पर हैं, तो दूसरी ओर उसी जाती के परिवार से कोई भी सरकारी नौकरी पर नहीं है | जिस प्रकार प्रधानमंत्री जी ने गैस सब्सिडी छोड़ने की अपील करी है, उसी प्रकार सक्षम परिवारों से आरक्षण छोड़ने की अपील भी करनी चाहिए | आज एक MP या MLA का बच्चा अगर आरक्षण के आधार पर कॉलेज में एडमिशन लेता है तो उसे रोकने के लिए कोई कानून नहीं है | कुछ निम्न जाती के लोगों का यह कहना है की हमारे पूर्वजों के ऊपर उच्च जाती वालों के...

रेप की घटनाएं आखिर बढ़ क्यों रही हैं ?

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रेप की घटनाएं आखिर बढ़ क्यों रही हैं ? कौन जिम्मेदार है इस चीज़ का ? कोई कहता है सरकार जिम्मेदार है ! कोई कहता है पुलिस निकम्मी हो गयी है ! कोई कहता है पश्चिमी मानसिकता का असर है ! कोई बॉलीवुड को कोसता है ! कोई लड़कियों को ही जिम्मेदार मानता है ! हर व्यक्ति का अलग निष्कर्ष होगा | यही नहीं हर किसी के पास इस चीज़ को रोकने का उपाय भी होगा | अब उपाय भी सुन लीजिये |

NPS Calculator - पेंशन का अंदाज़ा लगायें

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यह NPS Calculator आपको आपकी सेवानिवृत्ति (retirement) पर बनने वाली pension का एक अंदाज़ा देगा | साथ ही आप यह भी जान पायेंगे कि सेवानिवृत्ति के समय आपको कितनी रकम lump-sum amount के रूप में मिलेगी | हम अभी यह नहीं बता सकते कि पुरानी पेंशन अच्छी थी या NPS एक बढ़िया स्कीम है , किन्तु इस NPS Calculator से आपको एक अंदाज़ा लगाने में मदद मिलेगी | आपके द्वारा यहाँ भरा गया data कहीं पर भी save नहीं किया जाता, अतः आप निश्चिन्त हो कर इसका प्रयाग कर सकते हैं | इस NPS Calculator को अंग्रेजी में बनाया गया है, जिससे आज के पढ़े-लिखे नौकरीपेशा लोग आसानी से इसका उपयोग कर सकें | NPS Calculator Your Basic Salary : Rs Present DA % : % Expected per year increase in DA % : % NPS investment per month : % of basic+DA NPS contribution by Govt. : % of basic+DA Central/State Govts. contribute amount equal to 10%-14% of your basic salary. How long are you planning to double your investment: years You should answer the above question if you have joined NPS few years after joining. Will you get a sim...

बलात्कार का विरोधी हमारा बॉलीवुड और मीडिया ?

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आपने अक्सर देखा होगा की जब कोई बलात्कार की खबर नेशनल टीवी की खबर बनती है, जैसा की निर्भया काण्ड में हुआ था , तब बॉलीवुड हस्तियाँ महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की बात करने के लिए न्यूज़ चैनल्स पर बढ़ चढ़ कर बयान देते हैं. न्यूज़ चैनल्स के रिपोर्टर्स भी उन की ही बातें सारे दिन टीवी पर दिखाते हैं | आखिर सच्चाई क्या है ? क्या वाकई इन कलाकारों को कोई फर्क पड़ता है इन घटनाओं से ? या ये भी सिर्फ एक पब्लिसिटी स्टंट होता है | क्या न्यूज़ चैनल्स इन पीड़ित लड़कियों के साथ इन्साफ करना चाहते हैं | बलात्कार का विरोधी हमारा बॉलीवुड ? वो कहते हैं "We are gathering for a good cause", काहे का गुड कॉज ! वो महिलाओं के सम्मान की बात करते हैं और अपनी फिल्मों में नग्नता की सारी हदें पार कर देते हैं, और कोई पूछे तो कह देते हैं की ये तो स्टोरी की डिमांड थी ! Its a form of Art ! कोई इनसे पूछे की क्या आर्ट सिर्फ कपडे उतार के ही दिखाई जा सकती है क्या ? क्या आज तक बलात्कार का विरोध करने वाली किसी हिरोइन ने ये कहा है की वो अबसे कोई हॉट सीन नहीं करेगी | कहने को तो s-e-x भी कोई बुरी चीज़ नहीं है , यदि पति पत्नी ...

भारतीय धर्मनिर्पेक्षता : एक राजनितिक छल

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धर्मनिर्पेक्षता (Secularism), भारत में इस्तेमाल होने वाला एक ऐसा शब्द बन गया है जिसका उपयोग किसी की भलाई के लिए कम, राजनितिक दलों के इस्तेमाल के लिए ज्यादा हुआ है | यदि आप भारतीय धर्मनिर्पेक्षता के बारे में ज्यादा जानकारी एकत्र करेंगे तो पाएंगे की ये वास्तव में धर्मनिर्पेक्षता है ही नहीं | भारतीय संविधान में धर्मनिर्पेक्षता को एक कानून के रूप में ठीक से लागू किया ही नहीं गया, न ही इसकी कोई सही परिभाषा लिखी गयी | Wikipedia पर Secularism in India नामक एक लेख में ये बात सही तरीके से बताई गयी है | वहां नीचे दी गयी पंक्ति हुबहू लिखी गयी है | "Neither India's constitution nor its laws define the relationship between religion and state." "Religious laws in personal domain, particularly for Muslim Indians, supersede parliamentary laws in India; and currently, in some situations such as religious indoctrination schools the state partially finances certain religious schools. These differences have led a number of scholars[8][30][31] to declare that India is not a secular ...

क्या आतंकवाद को किसी के धर्म से जोड़ना सही है ?

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वैसे तो आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता | चंद सिरफिरे लोगों की वजह से आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़ना सही नहीं है | लेकिन ये भी सभी जानते हैं की दुनिया भर में किस धर्म से जुड़े हुए लोग आतंकवाद में सबसे ज्यादा लिप्त हैं | नौ -ग्यारह का आतंकवादी हमला , ओसामा-बिन-लादेन , ISIS और न जाने कितने आतंकवादी हमले एक ही धर्म को इन हमलों से जोड़ते हैं | लेकिन फिर भी एक संवेदनशील इंसान आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ेगा | आतंकी गतिविधियों में लिप्त ज्यादातर युवा या तो भटके हुए हैं, या भड़काए हुए हैं, या किसी व्यक्तिगत फायदे के लिए आतंक फ़ैलाने में लगे हैं | लेकिन ये भी सच्चाई है की सभी विचारक इतने संवेदनशील नहीं हैं | कुछ व्यक्ति ऐसे भी होते हैं जो बिना किसी की संवेदना की चिंता करे सच बोलना ही अपना धर्म मानते हैं | आज के समय में ज्यादातर सवालों के जवाब Google पर आराम से मिल जाते हैं | इसलिए हमने Google Trends की मदद से ये जानने की कोशिश करी की दुनिया क्या सोचती है | Google Trends के जरिये हम ये जान सकते हैं की दुनिया में लोग किन शब्दों को ज्यादा search करते हैं | धर्म और आतंकवाद को जोड़ कर देखने के लिए हम...

क्या हमारे देश का नाम इंडिया से बदलकर भारत करना सही होगा ?

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"इंडिया" नाम हमारे देश को ब्रिटिश शासकों ने दिया | कुछ लोग इसे "सिन्धु घाटी सभ्यता" से जोड़ते हैं , क्योंकि अंग्रेजी में उसे "इंडस वैली सिविलाइज़ेशन" (Indus Valley Civilization) कहते हैं , और "इंडस" शब्द से "इंडिया" शब्द तक पंहुचा जा सकता है | लेकिन असली मुद्दा ये है की जिस देश के 2% से भी कम लोग ही सही तरीके से अंग्रेजी बोल पाते हों , क्या उस देश का नाम अंग्रेजी में होना सही है | हमारे देश का हिंदी नाम "भारत" है , जिसका अपना एक अर्थ है , एक महत्व है , जो आपको इस लेख को पढ़ कर पता चलेगा | इंडिया और इंडियन का शाब्दिक अर्थ क्या है ? ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी को अंग्रेजी भाषा का सबसे बढ़िया शब्दकोष माना जाता है | सन 1900 की Oxford Dictionary के प्रष्ठ 789 में "India" और "Indian" शब्द का अर्थ "Poor - Old fashioned - Criminal people" अर्थात "गरीब -पुराने विचारों वाले -अपराधी" है | ब्रिटिश राज में खास जगहों से भारतियों को वर्जित रखने के लिए "Dogs and Indians are Not Allowed" लिख कर बोर्ड लग...

शिक्षक , अध्यापक और गुरु में क्या अंतर है

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आज शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर सभी शिक्षकों को बधाइयाँ मिल रही हैं | लेकिन एक सत्य ये भी है की हमारा समाज शिक्षक शब्द का अर्थ भी भूलता जा रहा है | हम अध्यापक और शिक्षक को एक ही समझने लगे हैं | एक अध्यापक शिक्षक हो सकता है , लेकिन ये जरूरी नहीं की हर अध्यापक शिक्षक हो | इस बात को समझने के लिए आपको  शिक्षक , अध्यापक और गुरु जैसे शब्दों का शाब्दिक अर्थ पता होना जरूरी है | हिंदी एक अनूठी भाषा है | हम कुछ शब्दों को पर्यायवाची समझते हैं , जबकि असलियत ये है की हिंदी के हर शब्द का अर्थ अलग है | कुछ शब्द एक जैसे प्रतीत होते हैं , पर उनके असली अर्थ में कुछ बारीक फर्क जरूर होता है | शिक्षक और अध्यापक भी दो ऐसे ही शब्द हैं | जो लोग गुरु को शिक्षक समझने की भूल करते हैं , उन्हें तो अपनी शब्दावली को विकसित करने की जरूरत है | शिक्षक : शिक्षक से हम शिक्षा प्राप्त करते हैं | शिक्षक वह व्यक्ति  है जो हमें जीवन में उपयोग में आने वाली चीज़ें सिखाता है | इसमें व्यावहारिक ज्ञान से लेकर हमारे त्योहारों और रीती रिवाजों तक का ज्ञान शामिल होता है | इसीलिये किसी भी व्यक्ति का सबसे पहला शिक्षक उसके म...

NOTA : सही या गलत ? मर्ज़ी है आपकी !

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इस लोकसभा चुनाव में "NOTA" अर्थात "None of the Above" (इनमें से कोई नहीं) का बटन दबाने के बारे में देश में गहन विचार विमर्श चल रहा है | जनता जागरूक हो रही है , और किसी ऐसे नेता को चुनना नहीं चाहती जो गलत हो | किन्तु NOTA का बटन दबा कर क्या हम वाकई ऐसा करने में सफल होते हैं ? इस सवाल का जवाब जरा समझने वाला है | NOTA का इस्तेमाल अक्सर वो वर्ग करता है , जो समझदार है या फिर खुद को समझदार समझता है | ऐसा इसलिए क्योंकि उस समझदार वोटर ने यह तो जांच लिया की कोई भी उम्मीदवार उस के वोट के लायक नहीं, किन्तु साथ ही उसने अपने वोट को व्यर्थ करने का भी पूरा बंदोबस्त कर लिया | NOTA को वोट करने का फायदा तब होता है जब सबसे ज्यादा वोट NOTA को मिलें , किन्तु ऐसा होने के आसार बहुत ही कम होते हैं | इसलिए अक्सर NOTA को दिया हुआ वोट , वोट न देने के बराबर ही हो जाता है | राजनीति में सौ प्रतिशत शुद्ध व्यक्ति मिलना बहुत मुश्किल है | यदि आप ये सोचते हों की अटल बिहारी या लाल बहादुर शास्त्री जैसे व्यक्ति आपके क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे , तो आपको शायद निराशा हाथ लगे | वह जमाना और था, आज राजनीति एक...