Posts

Showing posts with the label धर्म

Shri Krishna Geeta Updesh in Hindi Video with English Subtitles

Image
Shri Krihna's Bhagwad Geeta is known as the summary of all Hindu Vedas (Holy Books). Geeta tells about everything from birth of a person to the end. Geeta Updesh consist of all these things. Shri Krishna have given this Geeta Updesh to Arjun, his friend and student, in the middle of a war ground. No such updesh has even been given in the history of mankind. Arjun kept asking questions and Krishna gave answers in full detail, explaining each and everything.

कृष्ण की चेतावनी (Krishna ki Chetavani) - Ramdhari Singh Dinkar

Image
कृष्ण की चेतावनी (Krishna Ki Chetawani) वर्षों तक वन में घूम घूम बाधा विघ्नों को चूम चूम सह धूप घाम पानी पत्थर पांडव आये कुछ और निखर सौभाग्य न सब दिन होता है देखें आगे क्या होता है मैत्री की राह दिखाने को सब को सुमार्ग पर लाने को दुर्योधन को समझाने को भीषण विध्वंस बचाने को भगवान हस्तिनापुर आए पांडव का संदेशा लाये दो न्याय अगर तो आधा दो पर इसमें भी यदि बाधा हो तो दे दो केवल पाँच ग्राम रखो अपनी धरती तमाम हम वहीँ खुशी से खायेंगे परिजन पे अस्त्र ना उठाएंगे दुर्योधन वह भी दे ना सका आशीष समाज की न ले सका उलटे हरि को बाँधने चला जो था असाध्य साधने चला जब नाश मनुज पर छाता है पहले विवेक मर जाता है हरि ने भीषण हुँकार किया अपना स्वरूप विस्तार किया डगमग डगमग दिग्गज डोले भगवान कुपित हो कर बोले जंजीर बढ़ा अब साध मुझे हां हां दुर्योधन बाँध मुझे ये देख गगन मुझमे लय है ये देख पवन मुझमे लय है मुझमे विलीन झनकार सकल मुझमे लय है संसार सकल अमरत्व फूलता है मुझमे संहार झूलता है मुझमे भूतल अटल पाताल देख गत और अना...

रामायण के पहले श्लोक का रहस्य

Image
रामायण का पहला श्लोक केवल रामायण ही नहीं अपितु संस्कृत भाषा का भी पहला श्लोक है | इसे लिखने वाले ऋषि वाल्मीकि पहले रत्नाकर नाम के डाकू हुआ करते थे , किन्तु देव-ऋषि नारद की प्रेरणा से उनका ह्रदय परिवर्तन हुआ और वे एक महान ऋषि बने | गंगा स्नान के लिए जाते समय उन्हें तमसा नदी का स्वच्छ पानी देख कर स्नान करने का मन हुआ | वे स्नान कर ही रहे थे जब उन्हें क्रोंच पक्षी का एक जोड़ा प्रेम-मग्न दिखाई पड़ा, जिसे देख कर उन्हें बड़ी प्रसन्नता हुई | तभी एक तीर उनमें से नर पक्षी को आ लगा और उसके वियोग में मादा पक्षी विरह वेदना में तड़पने लगी | एक बहेलिये को पास आता देख ऋषि वाल्मीकि समझ गए की यह इसी मनुष्य का कृत्य है | क्रोध व् दुःख के वशीभूत होकर उनके मुख से उस निषाद के लिए श्राप के रूप में ये संस्कृत श्लोक निकला | मां निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः । यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम् ॥ अर्थात्: हे निषाद ! तुमने प्रेम मे मग्न क्रौंच पक्षी को मारा है। जा तुझे कभी भी प्रतिष्ठा की प्राप्ति नहीं हो पायेगी और तुझे भी वियोग झेलना पड़ेगा। कुछ समय पश्चात जब ऋषि वाल्मीकि ने रामायण ग्रन्थ की रचना करी त...

मां काली की उत्पत्ति कैसे हुई ?

Image
 " काली " शब्द को आमतौर पर केवल काले रंग से जोड़ कर समझा जाता है, किन्तु देवी काली का वास्तविक अर्थ काले रंग से कहीं अधिक है | "काली" शब्द "काल" शब्द का स्त्रीलिंग शब्द है| "काल" शब्द भगवान् शिव का ही नाम है , जिन्हें हम महाकाल व् कालभैरव जैसे नामों से भी जानते हैं | काल का अर्थ "मृत्यु" व् "समय" होता है | भगवान् शिव केवल मृत्यु के देवता नहीं बल्कि त्रिकालदर्शी भी हैं, अर्थात वे भूत-भविष्य-वर्तमान को भी देख सकते हैं | भगवान् शिव की शक्ति ही "काली" हैं | शक्ति ही जीव को प्राण देती है व् वही मृत्यु भी है | काली वह शक्ति है जो सृष्टि के उत्पन्न होने से पूर्व अन्धकार में भी व्याप्त थी और सृष्टि के अंत के पश्चात भी उसी घने काले अन्धकार में भी होगी | यूं तो काली सदा से हैं, और सदा रहेंगी , किन्तु उनके मूर्त रूप में आने के पीछे कई कथाएँ प्रचलित हैं | दारुक वध कथा  दारुक नाम के असुर ने ब्रह्मा को प्रसन्न कर के वरदान लिया की उसका वध केवल किसी स्त्री के हाथों ही हो | यह वरदान उसने इस घमंड में लिया की कोई स्त्री भला कैसे उसका वध...

धर्म का अपमान : क्यों और कब तक

Image
खुद को सही साबित करने के दो तरीके होते हैं -  पहला यह की कुछ अच्छे तर्कों के साथ अपनी बात बात को सही साबित किया जाए | दूसरा यह की सामने वाले को गलत साबित कर दिया जाए, भले ही वह गलत तर्कों से हो | जब ज्ञानव्यापी में मिली आकृति को हिन्दू पक्ष शिवलिंग , और मुस्लिम पक्ष फव्वारा बता रहा था, तब कुछ लोगों ने बहुत सी अनाप-शनाप चीज़ों को शिवलिंग बता कर हिन्दू धर्म को मज़ाक उडाना शुरू कर दिया | हालांकि यह कोई नयी बात नहीं है | अपने अल्लाह को सही साबित करने के लिए ये लोग हमारी मूर्तियों को "बुत" और उन मूर्तियों के उपासकों को "बुतपरस्त" बोलते आ रहे हैं | हिन्दू ने कभी अल्लाह के अस्तित्व पर सवाल नहीं उठाया क्योंकि उस अल्लाह की व्याख्या हमारे "निराकार भगवान्" से मेल खाती है, जिसे हम निर्गुण परमात्मा या शून्य स्वरुप मानते हैं | किन्तु अपने अल्लाह को सही साबित करने के चक्कर में (जो करने की जरूरत है ही नहीं ), जब आप दूसरे के भगवान् को गलत साबित करने में लग जाते हैं, तभी आप गलत हो जाते हैं | रही बात शिवलिंग और फव्वारे की तो वो तय करने के लिए न्यायालय है | न्यायालय कोई धार्म...

शिव सूत्र : संस्कृत से हिंदी भावार्थ सहित (Shiv Sutra Hindi Translation)

Image
शिव सूत्र कुछ ऐसे सूत्रों का संकलन है जो हमें आध्यात्मिक ज्ञान की उस उंचाई से अवगत कराती है , जो शायद भगवद गीता जैसे महाकाव्यों में ही मिलती है | शिव सूत्र की रचना ऋषि वासुगुप्त ने नवी शताब्दी में कश्मीर के महादेव पर्वत के निकट की थी | कहा जाता है की किसी सिद्ध पुरुष या स्वयं भगवान् शिव ने उनके स्वप्न में आकर ये सूत्र उनको बताये थे | कुछ विद्वानों का ये भी मानना है की भगवान् शिव ने ऋषि वासुगुप्त को एक चट्टान के बारे में बताया था जिस पर ये सभी सूत्र लिखे हुए थे | उस चट्टान का नाम शंकरोपला है, जिसके दर्शन करने लोग आज भी जाते हैं | हालाँकि अब उस चट्टान पर वे सूत्र नहीं दिखते | शिव सूत्र को माहेश्वर सूत्राणि के नाम से भी जाना जाता है | सूत्र अक्सर छोटे होते हैं, इसीलिये इन्हें सूत्र कहते हैं | किन्तु इन सूत्रों को केवल एक छोटा वाक्य समझने की भूल मत करना, क्योंकि हर सूत्र बहुत गहरा है | इनका शाब्दिक अर्थ चाहे छोटा लगे किन्तु भावार्थ बड़ा है | हर सूत्र का शब्दार्थ एक हो सकता है , किन्तु हर ज्ञानी पुरुष अपनी बुद्धिमत्ता और भाव के अनुसार अलग अलग भावार्थ तक पहुच सकता है | भावार्थ भाव से उ...

जब धर्म एक धंधा बन जाए, तब क्या होता है

Image
आज हमारे समाज में धर्म को धर्म ना मान कर, एक दूकान की तरह बना दिया है | लोग ये भूल ही गए हैं कि धर्म का उद्देश्य क्या है | हर कोई धर्म के तवे पे अपनी रोटी सकने पे लगा है | कभी आसाराम का भेद खुलता है, तो कभी रामपाल का | हमारे भारत में भक्ति भावना लोगों में कूट-कूट कर भरी हुई है | अगर भक्ति सिर्फ परमात्मा की हो तो ठीक है , लकिन जब ही भक्ति अपना मार्ग बदल कर कुछ ऐसे लोगों की हो जाती है जो खुद को भगवान् बताते हैं तब ये अंध-भक्ति हो जाती है | भक्ति बुरी नहीं है, पर अंधभक्ति बुरी है | हम ही हैं जो ऐसे इंसानों को भगवान् बनने देते हैं | आमतौर पर हम भगवान उसे मानते हैं जो हमारी मनोकामना पूरी कर दे | हम धर्म या भगवान की शरण में सिर्फ इसलिए जाते हैं, जिससे हम कुछ मांग सकें | इस मांगने के बदले में हम कुछ न कुछ चढ़ावा भी चढाने से कतराते नहीं हैं | चढ़ावा भी हम ये सोच कर चढाते हैं की हम तो दान कर रहे हैं | पर असलियत में आप दान नहीं दे रहे हैं , आप भगवान् से सौदा कर रहे हैं | जितनी बड़ी मनोकामना , उतना बड़ा दान | और ये काम सिर्फ अनपढ़ ही नहीं , पढ़े लिखे भी करते हैं | हमारी इसी आदत ने कुछ चतुर लोगों को ...

क्या आतंकवाद को किसी के धर्म से जोड़ना सही है ?

Image
वैसे तो आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता | चंद सिरफिरे लोगों की वजह से आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़ना सही नहीं है | लेकिन ये भी सभी जानते हैं की दुनिया भर में किस धर्म से जुड़े हुए लोग आतंकवाद में सबसे ज्यादा लिप्त हैं | नौ -ग्यारह का आतंकवादी हमला , ओसामा-बिन-लादेन , ISIS और न जाने कितने आतंकवादी हमले एक ही धर्म को इन हमलों से जोड़ते हैं | लेकिन फिर भी एक संवेदनशील इंसान आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ेगा | आतंकी गतिविधियों में लिप्त ज्यादातर युवा या तो भटके हुए हैं, या भड़काए हुए हैं, या किसी व्यक्तिगत फायदे के लिए आतंक फ़ैलाने में लगे हैं | लेकिन ये भी सच्चाई है की सभी विचारक इतने संवेदनशील नहीं हैं | कुछ व्यक्ति ऐसे भी होते हैं जो बिना किसी की संवेदना की चिंता करे सच बोलना ही अपना धर्म मानते हैं | आज के समय में ज्यादातर सवालों के जवाब Google पर आराम से मिल जाते हैं | इसलिए हमने Google Trends की मदद से ये जानने की कोशिश करी की दुनिया क्या सोचती है | Google Trends के जरिये हम ये जान सकते हैं की दुनिया में लोग किन शब्दों को ज्यादा search करते हैं | धर्म और आतंकवाद को जोड़ कर देखने के लिए हम...

गोस्वामी तुलसीदास के जीवन के रोचक तथ्य

Image
गोस्वामी तुलसीदास   का नाम सामने आते ही "रामचरितमानस" का स्मरण हो आता है | रामचरितमानस हिन्दुओं की सर्वाधिक प्रिय धार्मिक पुस्तकों में से एक है , जो गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रची गयी थी | इस के अलावा इन्होने हनुमान चालीसा और बजरंग बाण जैसे स्तुतियाँ भी लिखी , जो हिन्दुओं में आज भी कंठस्त पायी जाती हैं | तुलसीदास जी का जीवन बहुत रोचक रहा जिसका ज्ञान आपको नीचे दिए गए तथ्यों से हो जाएगा | अधिकाँश लोग ये सोचते हैं की तुलसीदास वैदिक काल के कवि हैं , किन्तु सत्य यह है की इनका जन्म सन 1532 में हुआ था और मृत्यु सन 1623 में हुई | यह वह समय था जब भारतवर्ष पर मुगलों का शासन था | अकबर और तुलसीदास समकालीन थे | तुलसीदास जी के जीवन के कुछ रोचक तथ्य ऐसे हैं जिन्हें ज्यादातर लोग नहीं जानते | गोस्वामी तुलसीदास के जीवन के रोचक तथ्य तुलसीदास जी के पिता का नाम आत्माराम दुबे था, जो पाराशर गोत्र के सरयूपारीण ब्राह्मण थे , और इनकी माता का नाम हुलसी था | अधिकतर इतिहासकार इनका जन्मस्थान सोरों (शूकरक्षेत्र), कासगंज , उत्तर प्रदेश को मानते हैं | सन 2012 में उत्तर प्रदेश सरकार ने आधिकारिक स्तर प...

क्या मनुष्य बिना खाए पिए वर्षों तक साधना कर सकता है ?

Image
हमने हिन्दू धर्म की पौराणिक गाथाओं में ऋषि-मुनिओं की तपस्या के बारे में बहुत कुछ पढ़ा व सुना है | कुछ टीवी धारावाहिकों में भी ये चीज़ दिखाई गयी है की ऋषि-मुनि सालों तक बिना कुछ खाए पिए तपस्या में लीन रहते थे | आज के समय में ये सब असंभव प्रतीत होता है | कुछ लोग इसे सिर्फ कल्पना मानते हैं , या कवियों द्वारा किया गया अतिशोक्ति अलंकार का प्रयोग भर मानते हैं | लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कुछ मामले सामने आये हैं जिन्होंने हमें अपना द्रष्टिकोण बदलने पर बाध्य किया है | भारत के प्रह्लाद जनि और नेपाल के राम बहादुर बामजान ऐसे ही कुछ योगिओं में से हैं जिन्होंने अपनी योग शक्ति के बल पर ये चमत्कार कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया है | कुछ लोग इसे शक की नज़र से देख रहे हैं , तो कुछ भक्ति और श्रधा की नज़र से | शक करना भी जायज़ है, क्योंकि हमारे मेडिकल विज्ञानं के अनुसार तो कोई व्यक्ति बिना पानी के 7 दिन से ज्यादा जीवित नहीं रह सकता | लेकिन एक वर्ग ऐसा भी है जो इन बातों पे पूरा विश्वास करते है और मानते है की योग साधना के बल पे कुछ भी संभव है | व्रत करना और अनशन पे बैठना अलग बात है , पर एक वर्ग ऐसा भी है जो...

हनुमान चालीसा

Image
रचयता : तुलसीदास (प्रसिद्ध हिंदी / अवधि कवि) भाषा : अवधि रचना का वर्ष : सोलहवी सदी हनुमान भगवान शिव के रूद्र-अवतार हैं और उन्हें उनके बल, पराक्रम, विद्वता और भक्ति के लिए जाना जाता है | हनुमान को उनकी अमरता के लिए भी जाना जाता है | उनके भक्तों में हनुमान चालीसा सबसे प्रसिद्ध प्रार्थनाओं में से एक है | भक्त ये मानते हैं की जो इस प्रार्थना को नियमित रूप से करता है , वह सदा निर्भय रहता है, उसके बुद्धि सदा सही मार्ग पर रहती है और कोई भी आसुरी शक्ति उसके निकट आने का साहस नहीं करती | हनुमान चालीसा में दो दोहे व चालीस चौपाई हैं | "हनुमान चालीसा" राम-भक्त हनुमान की सर्वाधिक प्रसिद्ध उपासनाओं में से एक है | यहाँ दी गयी हनुमान चालीसा को आप प्रतिदिन पढने का अभ्यास कर सकते हैं | आप इसे अन्य हनुमान-भक्तों के पास भी भेज सकते हैं | हनुमान चालीसा हिंदी अर्थ :     >" onclick=nextpic() style='text-align:center;font-weight:bold;font-size:20px;font-family:serif;color:blue' />