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भावनाओं का स्रोत : हृदय या मस्तिष्क - वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण

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मनुष्य का शरीर केवल रासायनिक और भौतिक क्रियाओं का पिंड नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा का भी एक सजीव स्रोत है। विज्ञान और अध्यात्म दोनों इस बात को मानते हैं कि हमारे शरीर से एक प्रकार का विद्युतचुंबकीय (electromagnetic) क्षेत्र उत्पन्न होता है। इस लेख में हम विशेष रूप से हृदय और मस्तिष्क द्वारा उत्पन्न विद्युतचुंबकीय क्षेत्रों का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक विश्लेषण करेंगे और यह समझने की कोशिश करेंगे कि इनका हमारे जीवन, भावनाओं और चेतना पर क्या प्रभाव पड़ता है। विद्युतचुंबकीय क्षेत्र क्या होता है? जब भी कोई विद्युत धारा किसी माध्यम से बहती है, तो उसके चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। इसी तरह से, जब हमारे शरीर में विद्युत गतिविधियाँ होती हैं – जैसे कि दिल की धड़कन या मस्तिष्क की तरंगें – तब हमारे शरीर के चारों ओर एक विद्युतचुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। यह क्षेत्र अदृश्य होता है, लेकिन वैज्ञानिक यंत्रों द्वारा इसे मापा जा सकता है। हृदय का विद्युतचुंबकीय क्षेत्र हृदय हमारे शरीर का सबसे शक्तिशाली विद्युत जनरेटर है। हृदय न केवल रक्त को पंप करता है, बल्कि यह प्रत...

क्या किशोरों का दिमाग जोखिम लेने के लिए बना है, या केवल दोस्तों का दबाव?

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किशोरों को अक्सर आवेगी, लापरवाह और रोमांच खोजने वाला कहा जाता है। माता-पिता को उनकी आदतों जैसे तेज़ गाड़ी चलाना, असुरक्षित यौन संबंध, नशे का प्रयोग करना या सोशल मीडिया की चुनौतियों में भाग लेने की आदतों को लेकर चिंता रहती है। लेकिन असली सवाल यह है: क्या यह सब उनके दिमाग की बनावट के कारण होता है या फिर केवल साथियों के दबाव से? brahmagyaan.in पर हम मस्तिष्क विज्ञान और मनोविज्ञान के आधार पर इस विषय को गहराई से समझेंगे। सच यह है कि दोनों कारण मिलकर किशोरों के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। किशोर मस्तिष्क: निर्माण की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किशोरावस्था में दिमाग पूरी तरह परिपक्व नहीं होता। दिमाग का विकास लगभग 25 वर्ष की आयु तक चलता है। प्रिफ्रंटल कॉर्टेक्स , जो समझदारी, योजना बनाने और आवेग पर नियंत्रण करने में मदद करता है, सबसे आख़िर में विकसित होता है। इसके विपरीत, भावनाओं और आनंद से जुड़ा लिम्बिक तंत्र पहले ही विकसित हो जाता है। यही कारण है कि किशोर अक्सर तुरंत मिलने वाले सुख या आनंद को लंबे समय के परिणामों से अधिक महत्व देते हैं। “किशोरावस्था वह समय है जब दिम...

क्या आप गलत तरीके से सांस ले रहे हैं ?

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हमारा सांस लेने का गलत तरीका हमारे तनाव में रहने का एक मुख्य कारण है ।  हम "6-pack-abs" के युग में रह रहे हैं, जहां आपके पेट की muscles को दिखाना आपकी fitness का प्रमाण है। Fitness freak, विशेष रूप से पुरुष, अपने पेट को अंदर खींचते हैं और अपनी छाती को बड़ा दिखाने के लिए सांस लेते हैं। Fitness के इन तथाकथित प्रमाणों ने हमारे सांस लेने के तरीके को बदल दिया है । यह वयस्कों में बढ़ती चिंता और तनाव (stress and anxiety) के पीछे एक प्रमुख कारण है। कौनसी Muscles हमें सांस लेने में मदद करती हैं ? सांस लेना केवल Lungs (फेफड़ों) का फैलना और सिकुड़ना नहीं है । इस प्रक्रिया में हमारी muscles (मांसपेशियों) का काफी बड़ा योगदान होता है । हमारे diaphragm, abdomen और पसलियों के बीच की muscles, सांस लेने में लगने वाले जोर का 80% भार वहन करती हैं । बाकी का 20% भार हमारे कंधे, गर्दन और उपरी छाती की muscles अपने ऊपर लेती हैं । गलत तरीके से सांस लेने से हम तनाव में कैसे आ जाते हैं ? कुछ लोगों का यह मानना है की हमारी कमर बिलकुल पतली होनी चाहिए और साथ ही पेट की muscles (6-pack-abs) भी दिखनी चाहिए । यह मा...

अपने बच्चों को लेड के जहर से बचाएं (Lead Poisoning)

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क्या आपको पता है कि जो पेंट हम घर की दीवारों पर इस्तेमाल करते हैं उसमें मिश्रित लेड (Lead) हमारे बच्चों के लिए कितना नुकसानदायक होता है | आम तौर पर इस चीज़ के बारे में किसी को पता ही नहीं होता | आजकल हम सब सिर्फ बाहरी वातावरण में हो रहे प्रदुषण के बारे में बातें करते हैं, और अपने घर की हवा को बिलकुल साफ़ समझते हैं | जबकि असलियत इस से काफी अलग है | आगे बढ़ने से पहले आपको लेड (Lead) से बच्चों को होने वाले नुकसानों के बारे में बताते हैं | लेड से बच्चों के दिमागी विकास में रूकावट आती है | कई बार ये रूकावट ऐसी होती है जिसे दवाइयों से भी ठीक नहीं किया जा सकता | लेड के जहर से बच्चों में हमेशा के लिए कम बौधिक क्षमता हो जाती है | बच्चों की कुछ नया सीख पाने की क्षमता भी खत्म हो जाती है | लेड से सिर्फ बच्चों को ही नहीं बड़ों को भी नुक्सान होता है | उन्हें हाई ब्लड प्रेशर , सर दर्द या याददाश्त कमज़ोर होने जैसी बीमारियाँ लगने की पूरी सम्भावना रहती है | लेड किस तरह हमारे और बच्चों के शारीर में पहुचता है लेड सांस के जरिये या दीवारों की पपड़ी खाने से बच्चों के शारीर में पहुचता है | छोटे बच्चे...

ओम (ॐ) का जाप आपको कैसे बेहतर बनाता है

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एक बार किसी ने बुद्ध से पूछा कि इतने वर्षों तक ध्यान करने से उन्हें क्या मिला। बुद्ध ने उत्तर दिया "कुछ नहीं! लेकिन मैंने क्रोध, चिंता, अवसाद, असुरक्षा, बुढ़ापे और मृत्यु का भय खो दिया"।  ध्यान और मंत्रों के जाप की महानता इस तथ्य में निहित है कि वे सभी नकारात्मक भावनाओं को आपसे दूर ले जाकर आपको बहुत कुछ देते हैं। यहां हम आपको "ॐ" या "ओम" जप करने के लाभों के बारे में बताएंगे। "ओम" की ध्वनि हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म में पवित्र मानी जाती है। इसे ब्रह्मांड की पहली ध्वनि के रूप में भी जाना जाता है। ओम (ॐ) भारतीय मूल की संस्कृत ध्वनि है। देवनागरी में इसे ओ३म् या ओम के रूप में भी लिखा जाता है। यह रहस्यमय शब्द अपने आप में एक संपूर्ण मंत्र भी माना जाता है। ओंकार या औंकारा भी ओम (ॐ) ध्वनि के ही संस्करण हैं। ओम का जाप अवसाद और तनाव का इलाज कर सकता है : USA के NCBI ने अपनी वेबसाइट पर एक शोध प्रकाशित किया है जिसमें निष्कर्ष निकाला गया है कि "ओम" का जाप आपके मस्तिष्क के विभिन्न हिस्सों को निष्क्रिय कर सकता है, जो अवसाद या तनाव विका...

क्या कोई व्यक्ति हिमालय पर केवल शॉर्ट्स पहन कर जीवित रह सकता है ?

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यह सवाल थोड़ा अजीब लगता है लेकिन किसी ने इस अलौकिक क्षमता को प्राप्त किया है। वह व्यक्ति न केवल हिमालय में शॉर्ट्स में जीवित रहा, बल्कि माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का साहस भी दिखाया । यह एक अनोखी उपलब्धि थी जो मानव जाति के इतिहास में किसी ने भी करने की हिम्मत नहीं की थी । इस व्यक्ति का नाम है "विम हॉफ" और उन्होंने यह वर्ष 2007 में किया और 23,600 फीट तक पहुंच गए । हालाँकि वह अपने प्रयास में सफल नहीं हुए, लेकिन फिर भी उन्होंने शॉर्ट्स और सैंडल में ऐसा करके विश्व रिकॉर्ड बनाया। Wim Hof , जिन्हें "आइस-मैन" के रूप में भी जाना जाता है, उन्होंने सांस और मन को नियंत्रित करने की शक्ति के माध्यम से इस अलौकिक क्षमता को प्राप्त किया। उनके अनुसार समर्पण और दृढ़ इच्छा शक्ति के जरिए कोई भी इसे हासिल कर सकता है। एवरेस्ट पर चढ़ना सिर्फ एक काम है जो विम हॉफ ने अपनी क्षमता दिखाने के लिए किया है। उन्होंने अंडर-आइस स्विमिंग (वर्ष 2000 में 57.5 मीटर), पानी के बिना नामीब रेगिस्तान में मैराथन दौड़ (2009) जैसे कार्यों के लिए 26 विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किए और 2 दिनों में सिर्फ शॉर्ट्स पहनकर माउं...

क्या मीठा खाने से मधुमेह (शूगर) होता है ?

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रक्त में ग्लूकोज का उच्च स्तर मधुमेह से जुड़ा हुआ है, लेकिन क्या मीठा खाने से आप मधुमेह से पीड़ित हैं, या हो सकते हैं ? परिवार में मधुमेह के इतिहास वाले अधिकांश लोग मधुमेह से खुद को बचाने के लिए चीनी से दूर रहते हैं। क्या चीनी से परहेज़ करने का यह कदम उन्हें मधुमेह से सुरक्षित रहने में मदद कर सकता है? इस लेख में हम चीनी और मधुमेह पर कुछ प्रकाश डालेंगे। अगर आप मीठे व्यंजन खाने के शौकीन हैं तो आपको यह लेख अवश्य पढ़ना चाहिए। क्या चीनी खाने से मुझे मधुमेह होता है? इस प्रश्न का उत्तर हाँ और नहीं, दोनों है, क्योंकि नियमित रूप से उच्च रक्त शर्करा आपको मधुमेह का शिकार बना सकता है। चीनी किसी को मधुमेह का शिकार बनाने के लिए  एकमात्र जिम्मेदार कारक नहीं है, मधुमेह के लिए कई अन्य कारक जिम्मेदार हैं। जब हम चीनी को डायबिटीज से जोड़ते हैं तो हमें समझना चाहिए कि चीनी कार्बोहाइड्रेट है। आहार में कार्बोहाइड्रेट का उच्च स्तर का मतलब है कि हमारे शरीर में उच्च स्तर का ग्लूकोज बनाया जाएगा। लेकिन चीनी सिर्फ एक कार्बोहाइड्रेट है। दूध में लैक्टोज, फलों में फ्रुक्टोज, आलू में कार्ब्स और हमारे आहार...

ठंडा पानी आपकी सेहत के लिए अच्छा या बुरा !

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गर्मी के मौसम में घर लौटने के बाद अधिकांश लोगों को ठंडा पानी पीना बेहद पसंद होता है। लेकिन क्या आपने कभी यह जानने की कोशिश की है कि यह एक स्वस्थ आदत है या नहीं। आम तौर पर हम महसूस करते हैं कि ठंडा पानी शरीर के तापमान को कम करता है और आराम करने में मदद करता है, जो कुछ हद तक सही है। यदि आप व्यायाम कर रहे हैं और अंतराल के दौरान ठंडा पानी पी रहे हैं तो यह आपके शरीर के तापमान को कम रखता है और आपको हाइड्रेटेड भी रखता है। लेकिन सच्चाई यह है कि ठंडा पानी पीने से आपके स्वास्थ्य पर कुछ नकारात्मक प्रभाव भी पड़ते हैं। ठंडा पानी पीने के नकारात्मक प्रभाव पाचन के दौरान पेट का तापमान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भोजन के ठीक बाद ठंडा पानी पीने से पाचन में बाधा आती है क्योंकि यह पाचन के लिए आवश्यक तापमान से कम तापमान कर देता है। ठंडा पानी पेट की मांसपेशियों को ठंडा कर देता है। और वे तब तक ठीक से काम नहीं कर पाती जब तक कि शरीर उनका तापमान नहीं बढ़ाता। आंत में जाने से पहले भोजन को तोड़ने के लिए पेट की मांसपेशियों का उचित कार्य करना आवश्यक है। यदि आपको कसरत विज्ञान का थोड़ा ज्ञान है, तो आप इस तथ्य क...

क्या गौ मूत्र से कोरोना जैसी बीमारी ठीक हो सकती है ?

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जब से कोरोना वायरस ने विश्व को घेरा है, तब से भारत भर में "गौ मूत्र" पर चर्चाएं चल रही है | कोई इसे आयुर्वैदिक औषधि बताता है, तो कोई अंधविश्वास | कोई इसके वैज्ञानिक आधार पर खरे न उतरने का तर्क देता है , तो कोई इस पर लिए गए पेटेंट्स की बात करता है | कोई इसे अमृत समझ कर पीने को तैयार है, तो कोई इसे अत्यंत घ्रणित वस्तु बता रहा है | वास्तविकता यह है की कोई भी सत्य जानने से ज्यादा , केवल अपने मत को सही सिद्ध करने में ज्यादा उत्सुक है | कुछ लोग धर्मांध होकर किसी भी गौ का मूत्र पीने को तैयार हैं , तो कोई तब तक पीने को तैयार नहीं है जब तक कोई अंग्रेज़ प्रोफेसर अंग्रेजी में उसे सही न बताये | जितना खतरा हमें चंद धर्मांध हिन्दुओं से है, उतना ही उन मतांध पढ़े लिखे लोगों से भी है जिन्हें अंग्रेजी में लिपटा हुआ असत्य भी सत्य लगता है | एक विष भी अमृत का काम कर सकता है यदि उसे सही मात्रा और सही विधि से लिया जाए, और एक औषधि भी विष का काम कर सकती है यदि उसे सही मात्रा और विधि से ना लिया जाए | हमारे पढ़े लिखे समाज को यह समझना चाहिए की आयुर्वेद भी एक विज्ञान है जो सदियों के शोध से विकसित हुआ है ...