क्या ये दिन देखने के लिए एक फौजी देश के लिए लड़ता है !
जब देश की सीमा पर कोई जवान शहीद होता है तो उस समय हमारी सरकारें उसके परिवार के लिए तरह-तरह की घोषणाएं करती हैं | उन घोषणाओं में से असलियत में कितनी कार्यान्वित होती हैं उनके बारे में कम ही लोगों को पता चलता है | लेकिन जो जवान वीरगति को प्राप्त नहीं होते, केवल ज़ख़्मी होते हैं, उन जवानों के बारे में कम ही लोगों को पता चलता है | हाल ही में एक समाचार पत्र में एक ऐसे ही वीर जवान की कहानी बताई गयी जो कारगिल युद्ध में दुश्मन से लोहा लेते हुए जख्मी हुआ और अपना एक पैर हमेशा के लिए खो दिया | उस वीर जवान को आज एक जूस की दूकान चला के अपने परिवार का पालन पोषण करना पड़ रहा है | सतबीर सिंह ने राजपुताना राइफल्स में रहते हुए जम्मू कश्मीर में आठ साल से ज्यादा का समय बिताया और कारगिल युद्ध में दुश्मन से लोहा लेते हुए अपने पैर में गोली लगने के कारण हमेशा के लिए अपाहिज हो गए, जिसके चलते उन्हें voluntary retirement लेना पड़ा | उस समय उनकी पेंशन 4000 रूपए प्रतिमाह निर्धारित हुई थी | उस समय के नियमानुसार युद्ध में घायल फौजियों को सेनानिवृत करने पर खेती के लिए जमीन दी जाती थी , जिसके लिए उन्होंने सरकारी दफ...