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श्री हरि स्तोत्र (Shri Hari Stotra)

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" श्री हरि स्तोत्र " एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्तोत्र है जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस स्तोत्र को श्री आचार्य ब्रह्मानंद द्वारा रचा गया है और इसमें भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी का भी संबंध दर्शाया गया है। श्री हरि स्तोत्र पाठ विधि: सवेरे उठकर नित्य क्रियाएं समाप्त करने के बाद स्नान करें। श्री गणेश का स्मरण करते हुए पूजन का आरंभ करें। स्तोत्र की शुरुआत करने के बाद, बीच में रुकना नहीं चाहिए। श्री हरि स्तोत्र के लाभ: इस स्तोत्र के जाप से व्यक्ति को तनाव से मुक्ति मिलती है। भगवान विष्णु के विशेष आशीर्वाद के साथ इस स्तोत्र का जाप फलदायी होता है। इस स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति मिलती है। बुरी आदतों और गलत संगत से छुटकारा प्राप्त होता है। पूर्ण श्रद्धा से इसे पाठ करने से मनुष्य को वैकुण्ठ लोक की प्राप्ति होती है। यह प्रत्येक प्राणी को दुख, शोक, जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति दिलाता है। इन समस्त लाभों से साथ ही, "श्री हरि स्तोत्र" का पाठ करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति और भगवान के प्रति श्रद्धा में भी वृद्धि होती है। यह स्तोत्र भगवान विष्णु के आदर...

शांति मंत्र | शांति पाठ | चाणक्य धारावाहिक title track

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90 के दशक में प्रचलित धारावाहिक “चाणक्य” का title track हमारे वेदों में से लिए गए “शांति मन्त्र” को बनाया गया था | आज भी इसे सुनना मन को शांति देता है | सुने, पढ़ें, समझें व् शांति की अनुभूति करें |  ओम् असतो मां सद् गमया |  तमसो मां ज्योतिर्गमया |  मृत्योर्मात अमृतम् गमया | अर्थ : हे प्रभु, मुझे असत्य से सत्य  की ओर ले चलो । मुझे अन्धकार से प्रकाश  की ओर ले चलो । मुझे मृत्यु से अमरता  की ओर ले चलो ॥ मंत्र स्रोत : यह मंत्र बृहदारण्यकोपनिषद् (1.3.28) से लिया गया है । इसे पवमान मन्त्र या पवमान अभयारोह मन्त्र भी कहा जाता है। सर्वेत्र सुखिनः सन्तु सर्वे सन्तु निरामया सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्।। अर्थ : सभी सुखी होवें,  सभी रोगमुक्त रहें,  सभी मंगलमय के  साक्षी बनें और किसी को  भी दुःख का भागी न  बनना पड़े।  इन्हीं मंगलकामनओं के  साथ आपका दिन  मंगलमय हो । मंत्र स्रोत : इसे "लोकक्षेम मंत्र" अर्थात सम्पूर्ण विश्व के कल्याण का मंत्र कहा जाता है । इस मंत्र के सही स्रोत का निष्कर्ष हम निकाल सके, क्...

Shri Ram Stuti - || श्री राम स्तुति ||

 || श्री राम स्तुति || दोहा श्री रामचंद्र कृपालु भजमन, हरण भाव भय दारुणम्। नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।। कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्। पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।। भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्। रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।। सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं। आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।। इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्। मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।। छंद मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों। करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।। एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली। तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।। सोरठा जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि। मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।

कालभैरवाष्टकम् with Audio (काल भैरव अष्टकम्)

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"कालभैरवाष्टकम्" संस्कृत भाषा में रचित नौ श्लोकों का समूह है , जिसे आदि-शंकराचार्य द्वारा रचा गया था | प्रथम आठ श्लोकों में भगवान् कालभैरव की स्तुति एवं गुणों का वर्णन है तथा एक फल श्रुति श्लोक है | कालभैरव भगवान् शिव का ही रुद्रावतार रूप है और भगवान् शिव के रक्त से इनकी उत्पत्ति हुई है | काशी नगरी को काल भैरव का मुख्य निवास स्थान माना जाता है | मान्यता है की भगवान् काल भैरव समस्त पापों का दंड दे कर आत्मा को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति देते हैं | पहली बार पढने पर यह थोडा कठिन प्रतीत होता है, इसलिए यहाँ पर एक "सरल" का बटन दबा कर आप इन श्लोकों को सरल शब्दों में संधि-विच्छेद कर के पढ़ सकते हैं और साथ ही प्रत्येक श्लोक का अर्थ भी जान सकते हैं | कालभैरवाष्टकम् Your browser does not support the audio element. Your browser does not support the audio element. Speed: हिंदी अर्थ :       क्या आप इस "कालभैरवाष्टकम्" को लगातार सुनना चाहते हैं ? यदि "हाँ" तो कितनी बार :

गायत्री मंत्र - क्या आप इसका गलत उच्चारण करते हैं ?

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"गायत्री मंत्र" शास्वत धर्म (हिन्दू धर्म) के सर्वाधिक प्रसिद्ध मन्त्रों में से एक है , इसी लिए इसे महामंत्र की उपाधि भी दी गयी है | गायत्री मंत्र के इतने प्रसिद्ध होने के पश्चात भी कई लोग या तो इसका सही उच्चारण नहीं करते या उनके मंत्र में ही कुछ त्रुटी होती है | यदि आप केवल इस मंत्र को सुनना चाहते हैं तो नीचे दिए गए Audio Player पर अपनी पसंद की ध्वनि में सुन सकते हैं | ध्वनि चुनें : गायत्री 01 गायत्री 02 गायत्री 03 गायत्री 04 गायत्री 05 गायत्री 21 ब्राह्मण गायत्री अथर्व वेद गायत्री शुक्ल यजुर्वेद गायत्री कृष्ण यजुर्वेद गायत्री कृष्ण यजुर्वेद 02 Your browser does not support the audio element. क्या आप "गायत्री मंत्र" को बार-बार सुनना चाहते हैं ? यदि "हाँ" तो कितनी बार : सामान्य रूप में संध्या वंदना में जिस गायत्री मंत्र का प्रयोग किया जाता है वह ऋषि विश्वामित्र रचित गायत्री मंत्र है , जो इस प्रकार है | ॐ भूर् भुवः स्वः। तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ अर्थ : उस प्राणस्वरूप, द...

महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र with Audio

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"महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र" माँ दुर्गा की सर्वाधिक प्रसिद्ध उपासनाओं में से एक है | आदि-शंकराचार्य द्वारा इसकी रचना २००० BC में करी गयी थी | पहली बार पढने पर यह थोडा कठिन प्रतीत होता है| यहाँ दिए गए स्तोत्र को आप प्रतिदिन पढने का अभ्यास कर सकते हैं | आप इसे अन्य भक्तों के पास भी भेज सकते हैं | महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र Your browser does not support the audio element. Your browser does not support the audio element. Speed: हिंदी अर्थ :       क्या आप इस "महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र" को लगातार सुनना चाहते हैं ? यदि "हाँ" तो कितनी बार :