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बलात्कार का विरोधी हमारा बॉलीवुड और मीडिया ?

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आपने अक्सर देखा होगा की जब कोई बलात्कार की खबर नेशनल टीवी की खबर बनती है, जैसा की निर्भया काण्ड में हुआ था , तब बॉलीवुड हस्तियाँ महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की बात करने के लिए न्यूज़ चैनल्स पर बढ़ चढ़ कर बयान देते हैं. न्यूज़ चैनल्स के रिपोर्टर्स भी उन की ही बातें सारे दिन टीवी पर दिखाते हैं | आखिर सच्चाई क्या है ? क्या वाकई इन कलाकारों को कोई फर्क पड़ता है इन घटनाओं से ? या ये भी सिर्फ एक पब्लिसिटी स्टंट होता है | क्या न्यूज़ चैनल्स इन पीड़ित लड़कियों के साथ इन्साफ करना चाहते हैं | बलात्कार का विरोधी हमारा बॉलीवुड ? वो कहते हैं "We are gathering for a good cause", काहे का गुड कॉज ! वो महिलाओं के सम्मान की बात करते हैं और अपनी फिल्मों में नग्नता की सारी हदें पार कर देते हैं, और कोई पूछे तो कह देते हैं की ये तो स्टोरी की डिमांड थी ! Its a form of Art ! कोई इनसे पूछे की क्या आर्ट सिर्फ कपडे उतार के ही दिखाई जा सकती है क्या ? क्या आज तक बलात्कार का विरोध करने वाली किसी हिरोइन ने ये कहा है की वो अबसे कोई हॉट सीन नहीं करेगी | कहने को तो s-e-x भी कोई बुरी चीज़ नहीं है , यदि पति पत्नी ...

भारतीय धर्मनिर्पेक्षता : एक राजनितिक छल

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धर्मनिर्पेक्षता (Secularism), भारत में इस्तेमाल होने वाला एक ऐसा शब्द बन गया है जिसका उपयोग किसी की भलाई के लिए कम, राजनितिक दलों के इस्तेमाल के लिए ज्यादा हुआ है | यदि आप भारतीय धर्मनिर्पेक्षता के बारे में ज्यादा जानकारी एकत्र करेंगे तो पाएंगे की ये वास्तव में धर्मनिर्पेक्षता है ही नहीं | भारतीय संविधान में धर्मनिर्पेक्षता को एक कानून के रूप में ठीक से लागू किया ही नहीं गया, न ही इसकी कोई सही परिभाषा लिखी गयी | Wikipedia पर Secularism in India नामक एक लेख में ये बात सही तरीके से बताई गयी है | वहां नीचे दी गयी पंक्ति हुबहू लिखी गयी है | "Neither India's constitution nor its laws define the relationship between religion and state." "Religious laws in personal domain, particularly for Muslim Indians, supersede parliamentary laws in India; and currently, in some situations such as religious indoctrination schools the state partially finances certain religious schools. These differences have led a number of scholars[8][30][31] to declare that India is not a secular ...

क्या आतंकवाद को किसी के धर्म से जोड़ना सही है ?

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वैसे तो आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता | चंद सिरफिरे लोगों की वजह से आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़ना सही नहीं है | लेकिन ये भी सभी जानते हैं की दुनिया भर में किस धर्म से जुड़े हुए लोग आतंकवाद में सबसे ज्यादा लिप्त हैं | नौ -ग्यारह का आतंकवादी हमला , ओसामा-बिन-लादेन , ISIS और न जाने कितने आतंकवादी हमले एक ही धर्म को इन हमलों से जोड़ते हैं | लेकिन फिर भी एक संवेदनशील इंसान आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ेगा | आतंकी गतिविधियों में लिप्त ज्यादातर युवा या तो भटके हुए हैं, या भड़काए हुए हैं, या किसी व्यक्तिगत फायदे के लिए आतंक फ़ैलाने में लगे हैं | लेकिन ये भी सच्चाई है की सभी विचारक इतने संवेदनशील नहीं हैं | कुछ व्यक्ति ऐसे भी होते हैं जो बिना किसी की संवेदना की चिंता करे सच बोलना ही अपना धर्म मानते हैं | आज के समय में ज्यादातर सवालों के जवाब Google पर आराम से मिल जाते हैं | इसलिए हमने Google Trends की मदद से ये जानने की कोशिश करी की दुनिया क्या सोचती है | Google Trends के जरिये हम ये जान सकते हैं की दुनिया में लोग किन शब्दों को ज्यादा search करते हैं | धर्म और आतंकवाद को जोड़ कर देखने के लिए हम...

क्या हमारे देश का नाम इंडिया से बदलकर भारत करना सही होगा ?

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"इंडिया" नाम हमारे देश को ब्रिटिश शासकों ने दिया | कुछ लोग इसे "सिन्धु घाटी सभ्यता" से जोड़ते हैं , क्योंकि अंग्रेजी में उसे "इंडस वैली सिविलाइज़ेशन" (Indus Valley Civilization) कहते हैं , और "इंडस" शब्द से "इंडिया" शब्द तक पंहुचा जा सकता है | लेकिन असली मुद्दा ये है की जिस देश के 2% से भी कम लोग ही सही तरीके से अंग्रेजी बोल पाते हों , क्या उस देश का नाम अंग्रेजी में होना सही है | हमारे देश का हिंदी नाम "भारत" है , जिसका अपना एक अर्थ है , एक महत्व है , जो आपको इस लेख को पढ़ कर पता चलेगा | इंडिया और इंडियन का शाब्दिक अर्थ क्या है ? ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी को अंग्रेजी भाषा का सबसे बढ़िया शब्दकोष माना जाता है | सन 1900 की Oxford Dictionary के प्रष्ठ 789 में "India" और "Indian" शब्द का अर्थ "Poor - Old fashioned - Criminal people" अर्थात "गरीब -पुराने विचारों वाले -अपराधी" है | ब्रिटिश राज में खास जगहों से भारतियों को वर्जित रखने के लिए "Dogs and Indians are Not Allowed" लिख कर बोर्ड लग...

गोस्वामी तुलसीदास के जीवन के रोचक तथ्य

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गोस्वामी तुलसीदास   का नाम सामने आते ही "रामचरितमानस" का स्मरण हो आता है | रामचरितमानस हिन्दुओं की सर्वाधिक प्रिय धार्मिक पुस्तकों में से एक है , जो गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रची गयी थी | इस के अलावा इन्होने हनुमान चालीसा और बजरंग बाण जैसे स्तुतियाँ भी लिखी , जो हिन्दुओं में आज भी कंठस्त पायी जाती हैं | तुलसीदास जी का जीवन बहुत रोचक रहा जिसका ज्ञान आपको नीचे दिए गए तथ्यों से हो जाएगा | अधिकाँश लोग ये सोचते हैं की तुलसीदास वैदिक काल के कवि हैं , किन्तु सत्य यह है की इनका जन्म सन 1532 में हुआ था और मृत्यु सन 1623 में हुई | यह वह समय था जब भारतवर्ष पर मुगलों का शासन था | अकबर और तुलसीदास समकालीन थे | तुलसीदास जी के जीवन के कुछ रोचक तथ्य ऐसे हैं जिन्हें ज्यादातर लोग नहीं जानते | गोस्वामी तुलसीदास के जीवन के रोचक तथ्य तुलसीदास जी के पिता का नाम आत्माराम दुबे था, जो पाराशर गोत्र के सरयूपारीण ब्राह्मण थे , और इनकी माता का नाम हुलसी था | अधिकतर इतिहासकार इनका जन्मस्थान सोरों (शूकरक्षेत्र), कासगंज , उत्तर प्रदेश को मानते हैं | सन 2012 में उत्तर प्रदेश सरकार ने आधिकारिक स्तर प...

हनुमान चालीसा में सूर्य से पृथ्वी की दूरी बताई गयी है

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कुछ विद्वान् ये मानते हैं कि पृथ्वी से सूर्य की दूरी हनुमान चालीसा में बताई गयी है | नीचे दी गयी चौपाई को वे इस बात का आधार मानते हैं | जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।। इस चौपाई का शाब्दिक अर्थ : सूर्य , जो हमसे युग x सहस्र  x योजन  की दूरी पर स्थित है , उसको आपने एक मीठा सा फल समझ के खा लिया | इस आधार पर सूर्य की दूरी  = युग (12000 वर्ष ) x सहस्र (1000) x योजन (12.3 km)    = 12000 x 1000 x 12.3 km    = 147600000 km    = 147,600,000,000 मीटर सूर्य से पृथ्वी की दूरी को 1AU (astronomical unit) कहा जाता है , जो  149,597,870,700 मीटर   के बराबर है | ये दूरी आज के आधुनिक उपकरणों से नापी गयी है | अब अगर हम इस से ये समझें की तुलसीदास जी ने सूर्य से पृथ्वी की दूरी का वर्णन हनुमान चालीसा में कर दिया, तो ये आस्था के हिसाब से गलत नहीं है | दोनों दूरियां लगभग एक सामान ही हैं | कुछ व्यक्ति इस हिसाब को संशय की दृष्टी से देखते हैं | उनका ये मानना है कि इन तीनो अंकों में केवल सहस्र ही एक ऐसा अंक है जिसका ...

क्या मनुष्य बिना खाए पिए वर्षों तक साधना कर सकता है ?

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हमने हिन्दू धर्म की पौराणिक गाथाओं में ऋषि-मुनिओं की तपस्या के बारे में बहुत कुछ पढ़ा व सुना है | कुछ टीवी धारावाहिकों में भी ये चीज़ दिखाई गयी है की ऋषि-मुनि सालों तक बिना कुछ खाए पिए तपस्या में लीन रहते थे | आज के समय में ये सब असंभव प्रतीत होता है | कुछ लोग इसे सिर्फ कल्पना मानते हैं , या कवियों द्वारा किया गया अतिशोक्ति अलंकार का प्रयोग भर मानते हैं | लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कुछ मामले सामने आये हैं जिन्होंने हमें अपना द्रष्टिकोण बदलने पर बाध्य किया है | भारत के प्रह्लाद जनि और नेपाल के राम बहादुर बामजान ऐसे ही कुछ योगिओं में से हैं जिन्होंने अपनी योग शक्ति के बल पर ये चमत्कार कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया है | कुछ लोग इसे शक की नज़र से देख रहे हैं , तो कुछ भक्ति और श्रधा की नज़र से | शक करना भी जायज़ है, क्योंकि हमारे मेडिकल विज्ञानं के अनुसार तो कोई व्यक्ति बिना पानी के 7 दिन से ज्यादा जीवित नहीं रह सकता | लेकिन एक वर्ग ऐसा भी है जो इन बातों पे पूरा विश्वास करते है और मानते है की योग साधना के बल पे कुछ भी संभव है | व्रत करना और अनशन पे बैठना अलग बात है , पर एक वर्ग ऐसा भी है जो...